फेल्स्पार गटातील खनिज. ॲनॉर्थोक्लेजमध्ये पोटॅशियमचे प्रमाण कमी आणि सोडियमचे प्रमाण जास्त असून त्याची रासायनिक संज्ञा (Na,K)AlSi3O8. पाटनपृष्ठातील पाटन (010) व (001) असून कोन जवळजवळ ९०° असतो. स्फटिक प्रणाली त्रिनताक्ष. स्फटिकांचा आकार समचतुष्फलकाकार (शंकरपाळ्यासारखे).

भौतिक गुणधर्म : रंग पांढरा, तपकिरी, पिवळा. पारदर्शकता पारदर्शक, द्युती काचेसारखी. कठिनता ६-६.५. विशिष्ट गुरुत्व २.५७ -२.६०. कस पांढरा.

प्रकाशीय गुणधर्म : वक्रीभवन दर्शकांक १.५१ – १.५३, उठाव अस्पष्ट. आकार अनियमित कणांच्या किंवा स्फटिकमय रूपात. विदलन तीन दिशांत. व्यतिकरण रंग प्रथम श्रेणीचा राखाडी. विलोपन तिर्यक, यमलन आढळते, परंतु त्यामधील काटकोनी रेखा अत्यंत कमी जाडीची असतात. या खनिजाच्या कोनाचे मूल्य आधार पिनॅकॉइडशी मोजल्यास केवळ २° इतके असते, त्यामुळे विलोपन आधार पिनॅकॉइडला समांतर असते.

आढळ : ॲनॉर्थोक्लेज खनिज सोडियम मुबलक असणाऱ्या अग्निज खडकात आढळते, तसेच काही क्षारीय ज्वालामुखी व उच्च तापमानात तयार झालेल्या अंतर्वेशी (घुसलेल्या) खडकांतदेखील आढळते.

भारतात ते राजस्थानातील अजमेर व भिलवाडा, महाराष्ट्रात डेक्कन (दक्षिण) ट्रॅप क्षेत्रात नर्मदा-तापी खचदरीमध्ये आढळते. तसेच हिंदी महासागरातील ४,००० मी. पेक्षा जास्त खोलीवरील बेसाल्ट खडकात त्याचे स्फटिक आढळतात. होन्शू जपान, मौंट एरेबस-अंटार्क्टिका येथे ॲनॉऑर्थोक्लेज आढळल्याचे संदर्भ आहेत.

उपयोग : ॲनॉर्थोक्लेज उपरत्न म्हणून तसेच दागिने तयार करण्यासाठी, त्याचप्रमाणे उच्च तापमानास तयार होणाऱ्या अग्निजन्य खडकांचा निदर्शक म्हणूनदेखील त्याचा उपयोग होतो.

संदर्भ : Klein, C., & Dutrow, B. Manual of Mineral Science, Wiley, 2007.                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                     समीक्षक : पी. एस. कुलकर्णी


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